खुलते ही बाजार में मची अफरा-तफरी
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए, जबकि लगभग सभी प्रमुख सेकोरों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य हमलों तथा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 4–5 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया और कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। यदि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत जैसे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
सेंसेक्स और निफ्टी पर असर
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। बैंकिंग, ऑटो, आईटी, मेटल और रियल्टी जैसे अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे।
किन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव?
बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। विशेष रूप से—
बैंकिंग शेयर
आईटी कंपनियां
ऑटो सेक्टर
मेटल शेयर
रियल एस्टेट कंपनियां
दूसरी ओर, ऊर्जा और तेल से जुड़ी कुछ कंपनियों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से इस क्षेत्र को समर्थन मिला।
निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई, रुपये पर दबाव और कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। यही वजह है कि विदेशी निवेशकों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों ने भी सतर्क रुख अपनाया है।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन अनिश्चितता बनी रहने पर उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा और सप्ताह की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। फिलहाल निवेशकों के लिए जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखना अधिक समझदारी होगी।
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