आखिर क्या है टार्डीग्रेड? 8 साल बिना खाएपिए
दुनिया में कई ऐसे जीव हैं जिनकी क्षमताएं इंसानों को हैरान कर देती हैं। 8 साल बिना खाएपिए ऐसा ही एक बेहद छोटा और अद्भुत जीव है टार्डीग्रेड (Tardigrade), जिसे आमतौर पर वॉटर बेयर भी कहा जाता है। यह सूक्ष्म जीव सामान्य परिस्थितियों में छोटा और साधारण दिखता है, लेकिन मुश्किल हालात आते ही अपने शरीर को ऐसी विशेष अवस्था में पहुंचा सकता है कि लंबे समय तक पानी और भोजन के बिना जीवित रहने की क्षमता हासिल कर लेता है।
कुछ वैज्ञानिक और शैक्षणिक स्रोतों में टार्डीग्रेड के लिए कई वर्षों तक बिना भोजन और पानी के निष्क्रिय अवस्था में जीवित रहने की क्षमता का उल्लेख मिलता है। हालांकि यह अवधि हर प्रजाति और पर्यावरणीय परिस्थिति में समान नहीं होती। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, “8 साल बिना खाएपिए ” जैसी अवधि को हर टार्डीग्रेड के लिए निश्चित नियम नहीं माना जाना चाहिए।
आखिर क्या है टार्डीग्रेड? 8 साल बिना खाएपिए
टार्डीग्रेड बेहद छोटे अकशेरुकी जीव हैं। अधिकांश प्रजातियां सूक्ष्म आकार की होती हैं और इन्हें देखने के लिए आमतौर पर माइक्रोस्कोप की जरूरत पड़ती है। इन्हें “वॉटर बेयर” नाम उनके अनोखे शरीर और चलने के तरीके के कारण मिला है।
टार्डीग्रेड काई, लाइकेन, मिट्टी और पानी वाले वातावरण सहित कई स्थानों पर पाए जाते हैं। लेकिन इनकी सबसे बड़ी खासियत है—मुश्किल परिस्थितियों में अपनी जीवन-प्रक्रियाओं को बेहद धीमा या लगभग निष्क्रिय कर देना।
8 साल बिना खाएपिए इतने लंबे समय तक कैसे रहते हैं?
जब वातावरण बहुत ज्यादा सूखा हो जाता है और पानी उपलब्ध नहीं रहता, तो कुछ टार्डीग्रेड प्रजातियां क्रिप्टोबायोसिस (Cryptobiosis) नाम की विशेष निष्क्रिय अवस्था में प्रवेश कर सकती हैं।
पानी की कमी से जुड़ी इस अवस्था को एन्हाइड्रोबायोसिस (Anhydrobiosis) कहा जाता है। इस दौरान जीव का शरीर अत्यधिक निर्जलित हो जाता है और उसकी सामान्य जैविक गतिविधियां बेहद कम हो जाती हैं। अनुकूल परिस्थितियां लौटने और पानी मिलने पर वह फिर से सक्रिय हो सकता है।
“टन स्टेट” में बदल जाता है शरीर
सूखे से बचने के लिए टार्डीग्रेड अपने शरीर को सिकोड़कर एक विशेष निष्क्रिय रूप में बदल सकता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में टन (Tun) स्टेट कहा जाता है।
यह अवस्था कोई सामान्य नींद नहीं है। इसमें जीव की सक्रिय जीवन-प्रक्रियाएं बहुत अधिक धीमी हो जाती हैं। यही कारण है कि वह उस समय सामान्य जीवों की तरह लगातार भोजन और पानी की आवश्यकता नहीं रखता।
क्या सचमुच 8 साल तक जीवित रह सकता है?
इस विषय में सावधानी जरूरी है। पुराने और विभिन्न स्रोतों में टार्डीग्रेड की लंबी अवधि तक निष्क्रिय अवस्था में जीवित रहने की क्षमता के अलग-अलग दावे मिलते हैं। एक वैज्ञानिक समीक्षा ने सुझाव दिया कि सबसे प्रतिरोधी टार्डीग्रेड में लगभग एक दशक तक की क्रिप्टोबायोटिक जीवित रहने की क्षमता अधिक यथार्थवादी ऊपरी सीमा हो सकती है, लेकिन सभी प्रजातियों और परिस्थितियों के लिए ऐसा दावा नहीं किया जा सकता।
इसलिए “8 साल तक बिना खाए-पिए जीवित” रहने वाला दावा इस जीव की असाधारण क्षमता को बताने का एक लोकप्रिय उदाहरण हो सकता है, लेकिन इसे हर टार्डीग्रेड पर लागू होने वाला पक्का वैज्ञानिक नियम नहीं समझना चाहिए।
30 साल बाद भी जीवित होने का रिकॉर्ड
टार्डीग्रेड की लंबी अवधि तक जीवित रहने की क्षमता से जुड़ा एक बेहद चर्चित वैज्ञानिक अध्ययन अंटार्कटिका से सामने आया था। वैज्ञानिकों ने 1983 में एकत्र किए गए और लगभग 30.5 वर्षों तक -20°C पर रखे गए नमूने से टार्डीग्रेड के जीवित व्यक्तियों और एक अंडे के विकास को दर्ज किया। यह मामला विशेष रूप से स्थिर जमी हुई परिस्थितियों में लंबे समय तक क्रिप्टोबायोसिस से जुड़ा था।
अत्यधिक परिस्थितियों को भी सहने की क्षमता
टार्डीग्रेड पर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी सिर्फ लंबे समय तक बिना पानी रहने की वजह से नहीं है। कुछ प्रजातियां निष्क्रिय अवस्था में अत्यधिक सूखापन, बहुत कम तापमान और अन्य कठिन परिस्थितियों को सह सकती हैं।
अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन के अनुसार, टार्डीग्रेड पूरी तरह सूखने के बाद वर्षों तक suspended animation जैसी अवस्था में रह सकते हैं। वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि उनके शरीर के विशेष प्रोटीन और अन्य जैविक तंत्र कोशिकाओं को नुकसान से कैसे बचाते हैं।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जीव?
टार्डीग्रेड की जीवित रहने की रणनीति को समझने से कई वैज्ञानिक क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। वैज्ञानिक विशेष रूप से यह जानना चाहते हैं कि:
कोशिकाएं अत्यधिक सूखने से कैसे बच सकती हैं।
जैविक सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है।
विशेष प्रोटीन कोशिकाओं को नुकसान से कैसे बचाते हैं।
अंतरिक्ष और अन्य कठिन वातावरणों में जीवन की सीमाएं क्या हैं।
इसी कारण टार्डीग्रेड को केवल एक अजीबोगरीब छोटा जीव नहीं, बल्कि आधुनिक जीवविज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण शोध विषय माना जाता है।
निष्कर्ष
टार्डीग्रेड ने जीवित रहने का सचमुच असाधारण तरीका विकसित किया है। जब परिस्थितियां सामान्य जीवन के लिए अनुकूल नहीं होतीं, तो कुछ प्रजातियां अपनी सक्रिय जीवन-प्रक्रियाओं को बेहद कम करके निष्क्रिय अवस्था में चली जाती हैं और अनुकूल वातावरण लौटने पर फिर सक्रिय हो सकती हैं।
हालांकि “8 साल बिना खाएपिए ” वाला दावा आकर्षक है, वैज्ञानिक दृष्टि से यह समझना जरूरी है कि जीवित रहने की अवधि प्रजाति, तापमान, नमी और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है। फिर भी इतना तय है कि टार्डीग्रेड पृथ्वी के सबसे अद्भुत और सहनशील सूक्ष्म जीवों में से एक है।
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