# आधी रात की लाल चूड़ियां: चुड़ैल की डरावनी कहानी गांव की चुड़ैल का खौफनाक रहस्य
राजस्थान की सीमा के पास बसे छोटे से गांव भैरवपुर में सूर्यास्त के बाद कोई भी व्यक्ति पुराने पीपल के पेड़ की तरफ नहीं जाता था। गांववालों का कहना था कि रात के ठीक बारह बजे वहां लाल चूड़ियों की खनक सुनाई देती है।
जिसने भी उस आवाज का पीछा किया, वह दोबारा पहले जैसा नहीं रहा।
गांव के बुजुर्ग बच्चों को चेतावनी देते थे—
“आधी रात को कोई औरत पीछे से नाम लेकर बुलाए, तो भूलकर भी पलटकर मत देखना। वह तुम्हारी परिचित आवाज में बुलाएगी, लेकिन होगी वह लाल चूड़ियों वाली चुड़ैल।”
शहर में पढ़ने वाला अर्जुन ऐसी बातों को अंधविश्वास मानता था। कई वर्षों बाद वह अपनी दादी के पुराने मकान को बेचने भैरवपुर आया था। मकान के पीछे ही वह पीपल का विशाल पेड़ था।
अर्जुन के आने की खबर मिलते ही गांव के बुजुर्ग हरिराम उसके पास पहुंचे।
“बेटा, मकान बेचना है तो बेच देना, लेकिन रात को पीछे वाली खिड़की मत खोलना।”
अर्जुन मुस्कराया, “क्यों काका? क्या चुड़ैल अंदर आ जाएगी?”
हरिराम का चेहरा गंभीर हो गया।
“वह अंदर नहीं आती… अंदर वाले को बाहर बुलाती है।”
## पहली रात ( चुड़ैल की डरावनी कहानी )
उस रात गांव में तेज हवा चल रही थी। करीब साढ़े ग्यारह बजे बिजली चली गई। अर्जुन ने मोमबत्ती जलाई और दादी के पुराने कमरे की सफाई करने लगा।
कमरे में रखे एक संदूक के नीचे उसे लाल कपड़े में लिपटी एक पुरानी डायरी मिली। उसके पहले पन्ने पर दादी की लिखावट थी—
“जिस दिन लाल चूड़ियां दोबारा सुनाई दें, समझ लेना कि माधवी लौट आई है।”
अर्जुन ने जैसे ही माधवी का नाम पढ़ा, मकान के पीछे से चूड़ियों की हल्की खनक सुनाई दी।
खन… खन… खन…
वह कुछ देर तक चुपचाप सुनता रहा। आवाज धीरे-धीरे खिड़की के पास आने लगी।
तभी बाहर से एक स्त्री की आवाज आई—
“अर्जुन… खिड़की खोलो…”
अर्जुन का शरीर सिहर उठा। वह आवाज उसकी दादी जैसी थी, जबकि दादी की मृत्यु को पांच वर्ष बीत चुके थे।
“अर्जुन, मुझे ठंड लग रही है… खिड़की खोल दो।”
उसने खुद को समझाया कि हवा के कारण कोई भ्रम हो रहा है। लेकिन तभी खिड़की पर किसी ने तीन बार दस्तक दी।
ठक… ठक… ठक…
अर्जुन ने पर्दा थोड़ा हटाकर बाहर देखा। पीपल के नीचे सफेद साड़ी पहने एक औरत खड़ी थी। उसके हाथों में ढेर सारी लाल चूड़ियां थीं और लंबे बाल उसके चेहरे को ढके हुए थे।
अचानक उस औरत ने बिना चेहरा उठाए अपना हाथ अर्जुन की तरफ कर दिया। उसकी उंगलियां असामान्य रूप से लंबी थीं।
अर्जुन तुरंत पीछे हट गया। बाहर से एक भयानक हंसी सुनाई दी और फिर सब शांत हो गया।
## माधवी का रहस्य ( चुड़ैल की डरावनी कहानी)
सुबह अर्जुन डायरी लेकर हरिराम के पास पहुंचा। माधवी का नाम देखते ही हरिराम के हाथ कांपने लगे।
उन्होंने बताया कि लगभग चालीस वर्ष पहले माधवी गांव की सबसे सुंदर युवती थी। उसकी शादी पास के गांव के एक युवक मोहन से तय हुई थी। शादी की रात माधवी लाल जोड़ा पहनकर बारात की प्रतीक्षा करती रही, लेकिन बारात कभी नहीं आई।
गांव में खबर पहुंची कि रास्ते में मोहन की बैलगाड़ी नदी में गिर गई और उसकी मृत्यु हो गई। सदमा सहन न कर पाने के कारण माधवी उसी रात घर से गायब हो गई।
तीन दिन बाद उसकी लाल चूड़ियां पीपल के नीचे मिलीं, मगर माधवी का शरीर कभी नहीं मिला।
इसके बाद हर अमावस्या को कोई न कोई युवक गायब होने लगा। लोगों का मानना था कि माधवी की आत्मा अपने अधूरे दूल्हे को खोज रही है।
अर्जुन ने पूछा, “मेरी दादी माधवी को कैसे जानती थीं?”
हरिराम ने नजरें झुका लीं।
“तुम्हारी दादी और माधवी सगी बहनें थीं।”
अर्जुन चौंक गया।
हरिराम ने बताया कि माधवी की मृत्यु से जुड़ी पूरी कहानी गांववालों को कभी नहीं बताई गई। असली रहस्य दादी की डायरी में ही छिपा था।
## डायरी का आखिरी पन्ना
उस रात अर्जुन ने डायरी पढ़ना शुरू किया। कई पन्नों के बाद उसे दादी की अंतिम स्वीकारोक्ति मिली—
“मोहन की मृत्यु दुर्घटना नहीं थी। गांव के ठाकुर का बेटा माधवी से विवाह करना चाहता था। उसने मोहन की बैलगाड़ी नदी में गिरवा दी। माधवी को सच्चाई पता चली तो वह ठाकुर के घर पहुंच गई। बदनामी के डर से ठाकुर और उसके आदमियों ने माधवी की हत्या करके उसका शरीर पीपल के नीचे दबा दिया।”
आगे लिखा था—
“माधवी की आत्मा दुष्ट नहीं है। वह केवल अपनी अस्थियां और मोहन की दी हुई अंगूठी खोज रही है। जब तक दोनों वस्तुएं उसे नहीं मिलेंगी, उसकी आत्मा भटकती रहेगी।”
अर्जुन के हाथ कांपने लगे। तभी कमरे की मोमबत्ती अचानक बुझ गई।
दरवाजे के बाहर लाल चूड़ियों की खनक सुनाई दी।
खन… खन… खन…
इस बार वह आवाज दादी की नहीं थी। एक युवती रोते हुए कह रही थी—
“मुझे यहां से निकालो…”
दरवाजा अपने आप खुल गया। बाहर गीले पैरों के निशान दिखाई दिए, जो मकान से निकलकर पीपल के पेड़ की तरफ जा रहे थे।
अर्जुन ने फावड़ा उठाया और उन निशानों के पीछे चल पड़ा।
## पीपल के नीचे
आधी रात हो चुकी थी। चांद बादलों में छिपा था और पूरे गांव में अजीब सन्नाटा पसरा था।
पीपल के पास पहुंचते ही अर्जुन को सफेद साड़ी पहने वही औरत दिखाई दी। इस बार उसके लंबे बाल हवा में उड़ रहे थे। उसके पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए थे।
अर्जुन डर के कारण वहीं रुक गया।
औरत धीरे-धीरे उसकी तरफ मुड़ी। उसका आधा चेहरा बेहद सुंदर था, लेकिन दूसरा आधा मिट्टी और घावों से भरा हुआ था।
उसने पीपल की जड़ों की ओर इशारा किया।
अर्जुन ने वहां खुदाई शुरू कर दी। कुछ देर बाद फावड़ा किसी कठोर वस्तु से टकराया। मिट्टी हटाने पर एक पुराना लकड़ी का संदूक निकला।
संदूक में इंसानी अस्थियां, लाल चूड़ियों के टूटे टुकड़े और चांदी की एक अंगूठी रखी थी।
अंगूठी देखते ही माधवी जोर-जोर से रोने लगी। उसका रोना पूरे गांव में गूंजने लगा। पीपल की शाखाएं तूफान की तरह हिलने लगीं।
अर्जुन ने अस्थियों के पास अंगूठी रख दी और कहा—
“माधवी, तुम्हारा प्रेम अधूरा नहीं था। मोहन ने तुम्हें धोखा नहीं दिया था। अब तुम आजाद हो।”
माधवी ने पहली बार उसकी तरफ देखकर मुस्कराने की कोशिश की। उसका डरावना चेहरा धीरे-धीरे एक सुंदर दुल्हन के चेहरे में बदल गया।
दूर कहीं शहनाई की धीमी आवाज सुनाई देने लगी।
माधवी के सामने सफेद कपड़े पहने एक युवक की धुंधली आकृति दिखाई दी। उसने अपना हाथ माधवी की ओर बढ़ाया। माधवी ने उसकी उंगलियां थाम लीं।
दोनों धुंध में आगे बढ़ने लगे और देखते ही देखते गायब हो गए।
जमीन पर केवल दो साबुत लाल चूड़ियां रह गईं।
## आखिरी खनक
अगले दिन गांववालों ने माधवी की अस्थियों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया। उसके बाद पीपल के पास चूड़ियों की आवाज सुनाई देना बंद हो गई।
अर्जुन ने दादी का मकान बेचने का विचार छोड़ दिया और कुछ दिनों बाद शहर लौट गया।
कई महीने बीत गए।
एक रात अर्जुन अपने शहर वाले घर में सो रहा था। ठीक बारह बजे उसके मोबाइल की स्क्रीन अपने आप जल उठी। स्क्रीन पर एक अनजान नंबर से संदेश आया था—
“मेरी चूड़ियां अभी भी तुम्हारे पास हैं…”
अर्जुन घबराकर उठा। कमरे में कोई नहीं था।
तभी उसके बिस्तर के नीचे से लाल चूड़ियों की खनक सुनाई दी।
खन… खन… खन…
उसने कांपते हाथों से नीचे देखा।
वहां वही दो लाल चूड़ियां रखी थीं, जिन्हें वह पीपल के नीचे छोड़कर आया था।
और उसके पीछे किसी औरत की धीमी आवाज सुनाई दी—
“अर्जुन… अब मेरी बहन की बारी है…”
कमरे की बत्ती बुझ गई और अंधेरे में चूड़ियों की खनक लगातार तेज होती चली गई।
यह चुड़ैल की डरावनी कहानी प्रेम, विश्वासघात और अधूरी आत्मा का खौफनाक रहस्य खोलती है।
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