फिरोज खानके अनसुने किस्से

फिरोज खान के 10 अनसुने किस्से: बॉलीवुड का सबसे स्टाइलिश पठान

फिरोज खान के 10 अनसुने किस्से: बॉलीवुड का वह पठान जो अपनी शर्तों पर जिया

फिरोज खानके अनसुने किस्से उनकी फिल्मों की तरह ही रोमांच, जोखिम और शाही अंदाज से भरे हुए हैं। काउबॉय हैट, चमड़े के जूते, तेज रफ्तार गाड़ियां और हाथ में सिगार—फिरोज खान जब पर्दे पर आते थे, तो बाकी कलाकारों से बिल्कुल अलग दिखाई देते थे।

वे केवल अभिनेता नहीं, बल्कि निर्माता, निर्देशक और हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े स्टाइल आइकन में से एक थे। उन्होंने फिल्मों में विदेशी लोकेशन, तेज रफ्तार कारें, आधुनिक संगीत और भव्य दृश्य उस दौर में दिखाए, जब हिंदी सिनेमा के पास सीमित तकनीक और बजट हुआ करता था।

आइए जानते हैं फिरोज खान के जीवन और फिल्मों से जुड़े 10 रोचक एवं कम चर्चित किस्से।

1. तीन स्कूलों से निकाले जाने की कहानी ( फिरोज खानके अनसुने किस्से )

फिरोज खान बचपन से ही बेहद स्वतंत्र और विद्रोही स्वभाव के थे। उनका जन्म बेंगलुरु में हुआ और वहीं उनकी शुरुआती शिक्षा हुई।

जीवन परिचय से जुड़ी कई रिपोर्टों के अनुसार, अनुशासन तोड़ने और अपने बेबाक स्वभाव के कारण उन्हें अलग-अलग समय पर तीन स्कूलों से निकाल दिया गया था। वे पढ़ाई में कमजोर नहीं थे, लेकिन उन्हें किसी के बनाए नियमों में बंधकर रहना पसंद नहीं था।

सीनियर कैम्ब्रिज की परीक्षा पास करने के बाद भी उन्होंने कॉलेज में प्रवेश नहीं लिया। उनका सपना फिल्मों में काम करने का था, इसलिए वे अभिनेता बनने के लिए मुंबई चले गए।

आगे चलकर यही बेबाकी उनके व्यक्तित्व और फिल्मों की सबसे बड़ी पहचान बनी।

2. मुंबई में शुरुआत उतनी शाही नहीं थी (फिरोज खानके अनसुने किस्से )

फिरोज खान को देखकर लोगों को लगता था कि उनका पूरा जीवन शानो-शौकत में बीता होगा। वास्तविकता यह है कि फिल्मों में उनकी शुरुआत संघर्ष से भरी थी।

मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत मुख्य अभिनेता की भूमिकाएं नहीं मिलीं। शुरुआती दौर में उन्होंने छोटे बजट की फिल्मों और सहायक भूमिकाओं में काम किया।

उन्होंने वर्ष 1960 की फिल्म “दीदी” से प्रमुख रूप से अपना फिल्मी सफर शुरू किया। इसके बाद कई वर्षों तक उन्हें बड़ी सफलता के लिए इंतजार करना पड़ा।

वर्ष 1965 में आई “ऊंचे लोग” ने उनके अभिनय को विशेष पहचान दिलाई। इस फिल्म में उन्होंने राज कुमार और अशोक कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

यह फिरोज खान के अनसुने किस्सों में से एक है कि पर्दे पर आत्मविश्वास से भरे दिखाई देने वाले इस अभिनेता को अपनी जगह बनाने के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा।

3. अंग्रेजी फिल्म में भी किया था अभिनय

बहुत कम लोग जानते हैं कि फिरोज खान ने अपने शुरुआती करियर में एक अंग्रेजी फिल्म में भी काम किया था।

वर्ष 1962 में रिलीज हुई “टार्जन गोज टू इंडिया” में उन्होंने प्रिंस रघु कुमार की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में उनके साथ सिमी गरेवाल भी नजर आई थीं।

जब हिंदी फिल्मों में उन्हें बड़ी पहचान नहीं मिली थी, तब वे अंतरराष्ट्रीय निर्माण वाली फिल्म का हिस्सा बन चुके थे। हालांकि इससे उनका करियर तुरंत नहीं बदला, लेकिन कैमरे के सामने उनके आत्मविश्वास और अलग व्यक्तित्व को पहचान मिलने लगी।

4. अभिनेता से निर्देशक बनने का जोखिम

फिरोज खान केवल दूसरों की बनाई फिल्मों में अभिनय करके संतुष्ट नहीं थे। उनके मन में सिनेमा को लेकर अपने विचार और एक अलग दृश्य शैली थी।

जब उन्हें मनचाही भूमिकाएं नहीं मिलीं, तो उन्होंने निर्माता और निर्देशक बनने का फैसला किया। उन्होंने वर्ष 1972 की फिल्म “अपराध” का निर्माण और निर्देशन किया तथा उसमें अभिनय भी किया।

इस फिल्म के माध्यम से उन्होंने हिंदी सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अंदाज देने की कोशिश की। फिल्म में जर्मनी की लोकेशन और कार रेसिंग के दृश्य इस्तेमाल किए गए थे।

उस समय विदेश में इतनी भव्य शूटिंग करना किसी भारतीय निर्माता के लिए बहुत बड़ा आर्थिक जोखिम था। फिरोज खान ने यह जोखिम उठाया और साबित किया कि हिंदी फिल्में भी विदेशी एक्शन फिल्मों जैसा दृश्य अनुभव दे सकती हैं।

5. अफगानिस्तान में ‘धर्मात्मा’ की ऐतिहासिक शूटिंग

वर्ष 1975 में आई “धर्मात्मा” फिरोज खान के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल है। इसे अफगानिस्तान में शूट होने वाली शुरुआती और व्यापक रूप से पहली भारतीय फिल्मों में गिना जाता है।

उस दौर में विदेश में शूटिंग करना आज जितना आसान नहीं था। कलाकारों, तकनीकी टीम और उपकरणों को दूसरे देश में ले जाना बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद फिरोज खान ने काबुल और बामियान जैसी खूबसूरत जगहों पर शूटिंग की।

फिल्म में फिरोज खान के साथ हेमा मालिनी, रेखा, प्रेमनाथ और डैनी डेन्जोंगपा जैसे कलाकार थे। हेमा मालिनी ने भी वर्षों बाद अफगानिस्तान में हुई शूटिंग की यादें साझा की थीं। हेमा मालिनी की ‘धर्मात्मा’ शूटिंग से जुड़ी यादें

फिल्म की कहानी हॉलीवुड की मशहूर फिल्म “द गॉडफादर” से प्रेरित मानी जाती है, लेकिन फिरोज खान ने उसे भारतीय पारिवारिक भावनाओं, अपराध और बदले की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया।

6. हेमा मालिनी को खास नाम से बुलाते थे

फिरोज खान और हेमा मालिनी के बीच अच्छी दोस्ती थी। दोनों ने धर्मात्मा में साथ काम किया था।

हेमा मालिनी ने फिरोज खान के निधन के बाद उन्हें याद करते हुए बताया था कि वे उन्हें प्यार से “बेबी” कहकर बुलाते थे। उनके मुताबिक फिल्म इंडस्ट्री में फिरोज खान ही ऐसे व्यक्ति थे जो उन्हें इस नाम से बुलाते थे।

शूटिंग के दौरान फिरोज निर्देशक के रूप में सख्त और काम के प्रति गंभीर रहते थे, लेकिन अपने करीबी लोगों के साथ उनका व्यवहार बेहद गर्मजोशी भरा था।

उनका यह अंदाज दिखाता है कि पर्दे पर कठोर और दबंग दिखाई देने वाले फिरोज खान निजी जीवन में अपने दोस्तों के प्रति बेहद स्नेही थे।

7. ‘कुर्बानी’ के एक गाने ने बदल दिया भारतीय संगीत

वर्ष 1980 में रिलीज हुई “कुर्बानी” फिरोज खान के करियर की सबसे सफल फिल्मों में से एक बनी। फिल्म में फिरोज खान, विनोद खन्ना और जीनत अमान मुख्य भूमिकाओं में थे।

फिरोज खान अपनी फिल्मों के संगीत को लेकर बहुत सजग रहते थे। वे ऐसा संगीत चाहते थे जो हिंदी फिल्मों के पारंपरिक संगीत से अलग और आधुनिक हो।

फिल्म का गाना “आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए” पाकिस्तानी गायिका नाजिया हसन ने गाया था। संगीतकार बिद्दू द्वारा तैयार किए गए इस गीत ने भारतीय फिल्म संगीत में डिस्को और पॉप की नई लहर पैदा कर दी।

नाजिया हसन उस समय किशोरावस्था में थीं। इस गाने की सफलता ने उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। कुर्बानी का संगीत फिल्म की सफलता का बड़ा कारण बना।

यह फिरोज खान की दूरदृष्टि थी कि उन्होंने नई आवाज और अंतरराष्ट्रीय संगीत शैली को अपनाने का जोखिम उठाया।

8. फिल्मों में इस्तेमाल करते थे अपनी पसंद की गाड़ियां और घोड़े

फिरोज खान को तेज रफ्तार गाड़ियों, घोड़ों और फार्महाउस जीवन से विशेष लगाव था। उनका यह शौक केवल निजी जीवन तक सीमित नहीं था; वह उनकी फिल्मों में भी दिखाई देता था।

अपराध, धर्मात्मा, कुर्बानी, जांबाज और जानशीन जैसी फिल्मों में शानदार गाड़ियां, घोड़े और खुली लोकेशन प्रमुखता से दिखाई गईं।

उनका बेंगलुरु के पास एक बड़ा फार्महाउस था, जहां वे घोड़ों और प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करते थे। फिल्मों की चमक-दमक से दूर फार्महाउस पर उनका जीवन अपेक्षाकृत शांत होता था।

पर्दे पर दिखाई देने वाला उनका काउबॉय अंदाज केवल बनाई गई छवि नहीं था। घुड़सवारी, गाड़ियां और खुला जीवन वास्तव में उनके व्यक्तित्व का हिस्सा थे।

इसी कारण उन्हें कई बार “भारत का क्लिंट ईस्टवुड” भी कहा गया।

9. बेटे को लॉन्च किया, लेकिन असफलता के बाद नहीं दिया विशेष सहारा

फिरोज खान ने वर्ष 1998 की फिल्म “प्रेम अगन” से अपने बेटे फरदीन खान को लॉन्च किया। उन्होंने फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया था।

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई और इसकी काफी आलोचना भी हुई। किसी को उम्मीद हो सकती थी कि फिरोज अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके फरदीन को आसानी से दूसरी फिल्में दिलवा देंगे, लेकिन उनका नजरिया अलग था।

फरदीन खान ने बाद के एक साक्षात्कार में बताया कि पहली फिल्म की असफलता के बाद उनके पिता ने उनके साथ काफी सख्त व्यवहार किया। उन्होंने फरदीन को यह समझा दिया कि अब फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह उन्हें स्वयं बनानी होगी।

फिरोज खान चाहते थे कि उनका बेटा पारिवारिक नाम के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से सफलता हासिल करे। फरदीन खान द्वारा साझा किया गया अनुभव

10. बीमारी छिपाकर की ‘वेलकम’ की शूटिंग (फिरोज खानके अनसुने किस्से )

फिरोज खान की अंतिम फिल्म “वेलकम” वर्ष 2007 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने आरडीएक्स नाम के शक्तिशाली और मजेदार गैंगस्टर की भूमिका निभाई थी।

निर्देशक अनीस बज्मी के अनुसार, शूटिंग के दौरान फिरोज खान की तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी। बाद में पता चला कि वे कैंसर से जूझ रहे थे, लेकिन उन्होंने अपनी बीमारी की गंभीरता के बारे में लोगों को नहीं बताया।

फिल्म में उनका संवाद “अभी हम जिंदा हैं” बेहद लोकप्रिय हुआ। बाद में यह संवाद उनके प्रशंसकों के लिए और भी भावुक बन गया, क्योंकि यही उनकी अंतिम फिल्म साबित हुई।

27 अप्रैल 2009 को फिरोज खान का बेंगलुरु स्थित फार्महाउस पर निधन हो गया। उनकी इच्छा के अनुसार अंतिम समय में उन्हें उस जगह लाया गया था, जिससे उन्हें बेहद प्यार था।

फिरोज खान का शाही अंदाज क्यों था अलग?

फिरोज खान का स्टाइल केवल महंगे कपड़ों और गाड़ियों तक सीमित नहीं था। उनके भीतर अपने निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास था।

वे अपनी फिल्मों में कहानी से लेकर संगीत, कपड़े, लोकेशन और कैमरा एंगल तक हर छोटी चीज पर ध्यान देते थे। उनकी फिल्मों में महिला कलाकारों को भी उस दौर की अपेक्षा अधिक आधुनिक और आत्मविश्वासी रूप में प्रस्तुत किया जाता था।

उन्होंने हॉलीवुड की दृश्य शैली को भारतीय भावनाओं के साथ मिलाया। इसी कारण उनकी फिल्में अपने समय से आगे दिखाई देती थीं।

फिरोज खान की 5 यादगार फिल्में
धर्मात्मा

अफगानिस्तान की खूबसूरत लोकेशन, यादगार संगीत और अपराध की पारिवारिक कहानी ने इसे विशेष बनाया।

कुर्बानी

फिरोज खान, विनोद खन्ना और जीनत अमान की इस फिल्म ने एक्शन, दोस्ती और संगीत का नया अंदाज पेश किया।

जांबाज

शानदार सिनेमैटोग्राफी, संगीत और साहसिक कहानी के कारण जांबाज आज भी याद की जाती है।

दयावान

यह फिल्म तमिल फिल्म “नायकन” की हिंदी रीमेक थी। विनोद खन्ना और माधुरी दीक्षित इसमें प्रमुख भूमिकाओं में थे।

वेलकम

आरडीएक्स की भूमिका में फिरोज खान ने साबित किया कि गंभीर और स्टाइलिश अभिनेता शानदार कॉमेडी भी कर सकता है।

फिरोज खान के जीवन से क्या सीख मिलती है?

फिरोज खान ने अपना जीवन किसी दूसरे कलाकार की नकल करते हुए नहीं बिताया। उन्होंने फिल्मों और निजी जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई।

उनके जीवन से हमें सीख मिलती है कि:

सफलता के लिए जोखिम उठाना जरूरी है।
अपनी अलग पहचान बनाने से नहीं डरना चाहिए।
असफलता के बाद दिशा बदलना कमजोरी नहीं है।
नई प्रतिभा और तकनीक को अवसर देना चाहिए।
जिंदगी अपनी शर्तों पर जीनी चाहिए, लेकिन काम के प्रति अनुशासन बनाए रखना चाहिए।
निष्कर्ष फिरोज खानके अनसुने किस्से

फिरोज खान के अनसुने किस्से बताते हैं कि वे केवल स्टाइलिश अभिनेता नहीं, बल्कि दूरदर्शी फिल्म निर्माता भी थे। उन्होंने हिंदी सिनेमा को अफगानिस्तान की खूबसूरत लोकेशन, विदेशी कार रेसिंग, आधुनिक डिस्को संगीत और हॉलीवुड जैसा भव्य अंदाज दिया।

वे फिल्मों में भी राजा की तरह दिखाई दिए और निजी जीवन भी अपनी शर्तों पर जिया। उनकी चाल, संवाद बोलने का अंदाज और स्क्रीन पर मौजूदगी आज भी किसी दूसरे अभिनेता से मेल नहीं खाती।

इसलिए फिरोज खान को केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा का “ओरिजिनल स्टाइल आइकन” कहना गलत नहीं होगा।

અમારી દરેક પોસ્ટ સૌથી પહેલા વાંચવા નીચેની પ્રોસેસ ફક્ત એકજ વાર કરવાની રહેશે.

                                             <

આ વેબસાઈટ પર આપેલી તમામ સમાચાર અને વાતો રિપોર્ટરે રિપોર્ટ કરેલા છે અથવા તો કોઈક સોર્સ ઉપરથી લેવામાં આવેલા છે કે જે દરેક લેખના અંતમાં આપેલો જ હોય છે. અમારો પ્રયત્ન રહીયો કે તમને શ્રેષ્ઠ માહિતી સતત પહોંચાડવાનો છે અને રહેશે. આ સમાચાર તથા અન્ય વાતોની જવાબદારી જે-તે લેખક (રિપોર્ટર) તથા સોર્સની રહેશે www.gujjuabc.com વેબસાઈટ કે પેજની રહેશે નહીં.

આપણું પેજ “Gujjuabc” માણતા રહો અને શેર કરતા રહો!

આપના સહકારની આશા સહ,

ટીમ Gujjuabc

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top