11:11 वाली आख़िरी ट्रेन

11:11 वाली आख़िरी ट्रेन – एक रहस्यमयी प्रेम कहानी जिसने सबको रुला दिया

# **11:11 वाली आख़िरी ट्रेन**

रात के **11 बजकर 11 मिनट**।

अहमदाबाद रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म लगभग खाली हो चुका था।

स्टेशन मास्टर ने आख़िरी बार अनाउंसमेंट किया—

> **”प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर आने वाली आख़िरी ट्रेन कुछ ही क्षणों में आएगी…”**

आर्यन तेजी से दौड़ता हुआ प्लेटफॉर्म पर पहुँचा।

उसकी जेब में सिर्फ़ एक पुरानी तस्वीर थी।

तस्वीर में वह और उसकी मंगेतर **सान्वी** मुस्कुरा रहे थे।

लेकिन वह मुस्कान अब सिर्फ़ तस्वीरों में बची थी।

एक साल पहले सान्वी बिना कुछ बताए गायब हो गई थी।

न कोई फोन…

न कोई चिट्ठी…

न कोई सुराग।

पुलिस ने महीनों खोजबीन की, लेकिन कुछ नहीं मिला।

धीरे-धीरे सबने मान लिया कि वह अब इस दुनिया में नहीं है।

सिर्फ़ आर्यन को छोड़कर।

उसे हमेशा लगता था कि सान्वी कहीं न कहीं ज़िंदा है।

उसी समय उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।

> **”अगर सच जानना है… तो 11:11 वाली आख़िरी ट्रेन में बैठ जाना। अकेले आना।”**

पहले उसे लगा कोई मज़ाक कर रहा है।

लेकिन अगले ही पल उसी नंबर से एक तस्वीर आई।

तस्वीर देखकर उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

वह तस्वीर उसी दिन की थी, जब सान्वी गायब हुई थी…

और तस्वीर में सान्वी मुस्कुरा रही थी।

सीटी बजी।

ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी।

अजीब बात यह थी कि पूरे डिब्बे में सिर्फ़ **एक ही यात्री** बैठा था।

करीब सत्तर साल का एक बुज़ुर्ग।

उसने आर्यन को देखते ही कहा—

> **”बहुत देर कर दी बेटा…”**

आर्यन चौंक गया।

“आप मुझे जानते हैं?”

बुज़ुर्ग मुस्कुराए।

“मैं नहीं… लेकिन यह ट्रेन तुम्हें जानती है।”

आर्यन कुछ समझ पाता, उससे पहले ट्रेन चल पड़ी।

कुछ मिनट बाद उसने खिड़की से बाहर देखा।

स्टेशन, शहर और रोशनी सब गायब थे।

बाहर सिर्फ़ घना कोहरा था।

मोबाइल में नेटवर्क नहीं था।

घड़ी बंद हो चुकी थी।

लेकिन स्क्रीन पर समय अब भी **11:11** ही दिखा रहा था।

आर्यन घबरा गया।

“यह ट्रेन जा कहाँ रही है?”

बुज़ुर्ग ने धीरे से कहा—

> **”जहाँ अधूरी कहानियाँ अपना आख़िरी जवाब ढूँढ़ती हैं।”**

अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकी।

बोर्ड पर कोई नाम नहीं लिखा था।

सिर्फ़ एक शब्द चमक रहा था—

**”पछतावा”**

डिब्बे का दरवाज़ा अपने-आप खुल गया।

बाहर वही पार्क था, जहाँ आर्यन ने पहली बार सान्वी को प्रपोज़ किया था।

अचानक उसे सान्वी की हँसी सुनाई दी।

वह दौड़ पड़ा।

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

सिर्फ़ ज़मीन पर एक डायरी पड़ी थी।

डायरी के पहले पन्ने पर लिखा था—

> **”अगर तुम यहाँ तक पहुँच गए हो… तो इसका मतलब है कि तुमने मुझे कभी भुलाया नहीं।”**

यह सान्वी की लिखावट थी।

उसके हाथ काँपने लगे।

डायरी में लिखा था—

*”आर्यन… जिस दिन मैं गायब हुई, उस दिन मैं भागी नहीं थी। मैंने तुम्हें छोड़ने का फैसला भी नहीं किया था।”*

*”मैंने एक बहुत बड़े अपराध को अपनी आँखों से देखा था। कुछ लोग मेरे पीछे पड़ गए। अगर मैं तुम्हारे पास रहती, तो वे तुम्हें भी मार देते।”*

*”इसलिए मुझे गायब होना पड़ा।”*

आर्यन की आँखों से आँसू बहने लगे।

इतने में पीछे से कदमों की आहट आई।

वह पलटा…

सामने सान्वी खड़ी थी।

वही चेहरा।

वही मुस्कान।

लेकिन उसकी आँखों में अजीब-सी उदासी थी।

“सान्वी!”

आर्यन उसकी ओर भागा।

जैसे ही उसने उसका हाथ पकड़ना चाहा…

सान्वी धुएँ की तरह गायब हो गई।

सिर्फ़ उसकी आवाज़ गूँजी—

> **”कुछ लोग लौटकर मिलने नहीं आते… सिर्फ़ सच बताने आते हैं।”**

अचानक तेज़ हॉर्न बजा।

आर्यन की आँख खुली।

वह फिर उसी ट्रेन में था।

बुज़ुर्ग सामने बैठे मुस्कुरा रहे थे।

उन्होंने पूछा—

“सच मिल गया?”

आर्यन ने धीरे से सिर हिला दिया।

“लेकिन सान्वी कहाँ है?”

बुज़ुर्ग ने खिड़की की ओर इशारा किया।

“कुछ लोग शरीर से चले जाते हैं…

लेकिन उनका प्रेम कभी नहीं जाता।”

ट्रेन धीरे-धीरे स्टेशन पर आकर रुक गई।

घड़ी में समय था—

**11:12**

आर्यन जल्दी से नीचे उतरा।

वह पलटकर बुज़ुर्ग को धन्यवाद कहना चाहता था।

लेकिन पूरा डिब्बा खाली था।

गार्ड ने हैरानी से पूछा—

“बेटा, तुम अकेले किससे बात कर रहे थे?”

आर्यन ने ट्रेन की ओर देखा।

वहाँ कोई नहीं था।

उसकी नज़र सीट पर पड़ी।

वहीं सान्वी की डायरी रखी थी।

इसका मतलब…

जो कुछ हुआ…

वह सपना नहीं था।

डायरी के आख़िरी पन्ने पर सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—

> **”हर रात 11:11 पर कोई ट्रेन नहीं आती… लेकिन जिनका प्यार सच्चा होता है, उन्हें एक आख़िरी मौका ज़रूर मिलता है।”**

आर्यन मुस्कुराया।

उसने डायरी सीने से लगा ली।

उस रात पहली बार उसे सान्वी के जाने का दुख नहीं…

बल्कि उसके प्यार की गहराई महसूस हुई।

**समाप्त।**

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