वो हर रात उसके लिए चाय बनाती रही… लेकिन कभी नहीं जान पाई कि वो उसे कब से चाहता था
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें खिड़की से टकरा रही थीं।
नेहा हमेशा की तरह रसोई में थी। गैस पर चाय चढ़ी हुई थी। घड़ी रात के साढ़े दस बजा रही थी। अमित अभी तक ऑफिस से नहीं लौटा था।
यह पिछले सात सालों से लगभग हर रात का एक जैसा दृश्य था।
दरवाज़े की घंटी बजी।
नेहा मुस्कुराई, “आ गए…”
अमित अंदर आया। चेहरे पर थकान थी, लेकिन जैसे ही उसने नेहा के हाथ की चाय देखी, उसकी आंखों में एक अजीब-सी शांति उतर आई।
“तुम हर दिन इतनी देर तक मेरा इंतज़ार क्यों करती हो?” अमित ने पूछा।
नेहा हंस पड़ी।
“आदत है…”
बस इतना ही कहा उसने।
दोनों ने कभी “आई लव यू” नहीं कहा था।
लेकिन प्यार शायद हर दिन उन दो कप चाय में घुल जाता था।
एक रविवार घर की सफाई करते समय नेहा को अलमारी में एक पुरानी डायरी मिली।
डायरी अमित की थी।
जिज्ञासा हुई।
उसने पहला पन्ना खोला।
ऊपर तारीख लिखी थी…
12 जुलाई, 2017
नीचे एक लाइन…
“आज पहली बार उसने मेरे लिए चाय बनाई… शायद उसे नहीं पता, लेकिन मुझे उसी दिन उससे प्यार हो गया।”
नेहा की उंगलियां कांप गईं।
उसने अगला पन्ना खोला।
“वो जब भी पूछती है ‘थक गए हो?’… मुझे लगता है दुनिया का सबसे अमीर इंसान मैं हूं।”
फिर…
“काश एक दिन उसे बता पाऊं कि मेरी सबसे बड़ी खुशी प्रमोशन नहीं… उसका इंतज़ार है।”
नेहा की आंखों से आंसू गिरने लगे।
सात साल…
सात साल तक दोनों एक-दूसरे से प्यार करते रहे।
लेकिन कभी कहा नहीं।
उसी रात नेहा ने भी अपनी पुरानी डायरी निकाली।
उसमें लिखा था…
“मैं हर रात चाय इसलिए बनाती हूं क्योंकि मुझे डर लगता है… कहीं वो बाहर अकेला महसूस न करे।”
अगले पन्ने पर…
“अगर कभी वो पूछे कि मैं उससे कितना प्यार करती हूं… तो शायद जवाब नहीं दे पाऊंगी। क्योंकि कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं… आदतों से जीते जाते हैं।”
अगली सुबह अमित ऑफिस जाने लगा।
नेहा ने पहली बार उसे रोका।
“एक मिनट…”
अमित मुड़ा।
नेहा ने उसकी डायरी उसके हाथ में रख दी।
अमित समझ गया।
कुछ पल दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
ना कोई फिल्मी डायलॉग…
ना कोई बड़ा इज़हार…
बस दोनों की आंखें भीग गईं।
अमित मुस्कुराया और बोला—
“लगता है… हम दोनों बहुत देर से एक ही बात छुपा रहे थे।”
नेहा हंसते हुए बोली—
“हाँ… लेकिन शायद प्यार वही होता है जो बोलने से पहले महसूस हो जाए।”
उस दिन के बाद भी उनके घर में बहुत कुछ वैसा ही रहा।
रात की वही चाय…
दरवाज़े की वही घंटी…
थकान वही…
ज़िम्मेदारियाँ वही…
बस एक फर्क था।
अब दोनों जानते थे कि सामने बैठा इंसान सिर्फ जीवनसाथी नहीं…
उनकी पूरी दुनिया है।
कई बार प्यार “आई लव यू” कहने में नहीं होता।
प्यार उस इंसान में होता है…
जो हर रात पूछता है—
“खाना खाया?”
और उस इंसान में…
जो बिना कहे चाय बना देता है।
क्योंकि सच्चा प्यार आवाज़ नहीं करता…
वो बस हर दिन, हर छोटी आदत में जीता है।
समाप्त।
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