यह पति पत्नी की कहानी उन अनगिनत रिश्तों की कहानी है, जहाँ प्यार शब्दों से कम और एहसासों से ज़्यादा जिया जाता है। बारात लौट चुकी थी…
वो दुल्हन बनकर आई थी… बस चाहती थी कोई उसे समझने वाला हो
“हर लड़की अपने मायके से सिर्फ़ सामान लेकर नहीं आती… कुछ सपने भी साथ लाती है।”
बारात लौट चुकी थी।
घर मेहमानों की आवाज़ों से भरा हुआ था।
नई-नई दुल्हन बनी नंदिनी पहली बार अपने नए घर की दहलीज़ पर बैठी थी।
लाल चुनरी, हाथों की गहरी मेहंदी और आँखों में अनगिनत सपने…
उसे बचपन से सिर्फ़ एक ही सपना था।
“मेरा पति मेरा सबसे अच्छा दोस्त होगा।”
उसे महंगी कार नहीं चाहिए थी।
बड़ा बंगला भी नहीं।
बस इतना चाहती थी कि कोई उसकी बातें सुने…
उसकी हँसी को समझे…
और जब वह बिना वजह उदास हो जाए, तो पूछे…
“क्या हुआ?”
“पति पत्नी की कहानी”
शादी के शुरुआती कुछ दिन बहुत अच्छे गुज़रे।
सब लोग उसका ख़याल रखते थे।
आदित्य भी मुस्कुराकर बात करता था।
लेकिन धीरे-धीरे ज़िंदगी अपनी असली रफ़्तार में लौट आई।
सुबह ऑफिस…
शाम को थकान…
रात को मोबाइल…
और फिर नींद।
नंदिनी पूरे दिन घर संभालती।
सबका ध्यान रखती।
लेकिन जब रात होती…
तो उसके पास बात करने वाला कोई नहीं होता।
एक दिन उसने धीरे से कहा…
“आज चाय साथ में पीते हैं?”
आदित्य ने मोबाइल से नज़र उठाए बिना कहा…
“कल… आज बहुत थक गया हूँ।”
नंदिनी मुस्कुरा दी।
लेकिन उस मुस्कान के पीछे एक छोटी-सी उम्मीद टूट गई।
दिन महीने बन गए।
नंदिनी ने कभी शिकायत नहीं की।
जब आदित्य देर से आता…
वह खाना गरम कर देती।
जब उसकी पसंद का खाना बनाती…
तो बस यही सुनने का इंतज़ार करती…
“बहुत अच्छा बना है।”
लेकिन अक्सर जवाब होता…
“नमक थोड़ा कम है।”
एक शाम बारिश हो रही थी।
बिजली चली गई।
पूरा घर अँधेरे में डूब गया।
नंदिनी बालकनी में खड़ी बारिश देख रही थी।
उसे याद आया…
शादी से पहले उसने सोचा था…
बारिश होगी…
तो दोनों साथ चाय पिएँगे।
एक ही छतरी में भीगेंगे।
बहुत सारी बातें करेंगे।
लेकिन आज…
वह अकेली थी।
उसकी आँखों से एक आँसू निकल पड़ा।
उसी समय आदित्य बाहर आया।
उसने पहली बार ध्यान से देखा…
नंदिनी रो रही थी।
वह घबरा गया।
“क्या हुआ?”
नंदिनी ने तुरंत आँसू पोंछ दिए।
“कुछ नहीं…”
“नहीं… कुछ तो है।”
काफ़ी देर चुप रहने के बाद नंदिनी बोली…
“क्या मैं तुमसे एक बात पूछ सकती हूँ?”
“पूछो।”
“क्या शादी के बाद लड़कियों के सपने बदल जाते हैं…
या उन्हें अपने सपने छुपाने पड़ते हैं?”
आदित्य चुप हो गया।
उसने पहली बार महसूस किया…
कि वह अपनी ज़िम्मेदारियों में इतना उलझ गया था…
कि सामने बैठी उस लड़की को देखना ही भूल गया…
जो सब कुछ छोड़कर सिर्फ़ उसके भरोसे इस घर में आई थी।
उस रात आदित्य बहुत देर तक सो नहीं पाया।
उसे याद आया…
शादी के पहले वह हर छोटी बात पर नंदिनी को फोन करता था।
अब पूरे दिन में एक मैसेज भी नहीं भेजता।
उसे एहसास हुआ…
वह कमाने में तो सफल हो गया…
लेकिन रिश्ता निभाने में पीछे रह गया।
अगली सुबह…
नंदिनी की आँख खुली…
तो रसोई से चाय की खुशबू आ रही थी।
वह बाहर आई…
तो आदित्य मुस्कुराते हुए ट्रे लेकर खड़ा था।
“मैडम…
आज की चाय मेरी तरफ़ से।”
नंदिनी हैरान रह गई।
“तुम?”
आदित्य हँस पड़ा…
“हाँ…
और आज ऑफिस भी थोड़ा देर से जाऊँगा।”
दोनों बालकनी में बैठ गए।
बारिश रुक चुकी थी।
हल्की धूप निकल आई थी।
बहुत देर तक दोनों कुछ नहीं बोले।
फिर आदित्य ने धीरे से कहा…
“मुझे माफ़ कर दो।
मैं समझ ही नहीं पाया…
कि तुम्हें महंगे गिफ्ट नहीं…
मेरा थोड़ा-सा समय चाहिए था।”
नंदिनी की आँखें भर आईं।
उसने बस इतना कहा…
“मुझे तुमसे कभी कुछ बड़ा नहीं चाहिए था…
बस कभी-कभी मेरे पास बैठ जाया करो।”
उस दिन के बाद उनकी ज़िंदगी जादू की तरह नहीं बदली।
EMI अभी भी थी।
ऑफिस का तनाव भी था।
घर की ज़िम्मेदारियाँ भी थीं।
लेकिन एक नियम बन गया।
रोज़ रात को 20 मिनट…
न मोबाइल…
न टीवी…
सिर्फ़ दोनों।
कभी चाय…
कभी छत…
कभी टहलना…
और कभी बस एक-दूसरे की बातें सुनना।
एक साल बाद…
उनकी पहली शादी की सालगिरह थी।
आदित्य ने कोई हीरे का हार नहीं खरीदा।
बस एक छोटी-सी डायरी दी।
पहले पन्ने पर लिखा था…
“तुम दुल्हन बनकर इस घर में आई थीं…
और मैं तुम्हें समझ ही नहीं पाया।
अब वादा है…
ज़िंदगी भर तुम्हारी हर खामोशी भी सुनने की कोशिश करूँगा।”
नंदिनी मुस्कुरा दी।
उसने डायरी बंद की…
और पहली बार उसे लगा…
उसका सबसे बड़ा सपना आखिर पूरा हो गया था।
❤️ कहानी का संदेश “पति पत्नी की कहानी”
हर लड़की शादी के बाद महंगे गिफ्ट नहीं चाहती।
वह चाहती है…
कोई उसकी बात सुने…
उसकी चुप्पी समझे…
और दिन के अंत में सिर्फ़ इतना पूछ ले…
“आज तुम्हारा दिन कैसा था?”
क्योंकि…
कई बार रिश्ते बड़े वादों से नहीं…
रोज़ के छोटे-छोटे एहसासों से ज़िंदा रहते हैं। ❤️
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