वो हर रात मुझे मैसेज करती थी… लेकिन छह महीने पहले उसकी मौत हो चुकी थी
कमरे में सिर्फ़ मोबाइल की हल्की रोशनी थी। बाहर बारिश हो रही थी और खिड़की के शीशे पर गिरती बूंदों की आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी।
रोहन बिस्तर पर लेटा हुआ था, लेकिन नींद उसकी आंखों से बहुत दूर थी।
तभी उसके मोबाइल की स्क्रीन चमकी।
**WhatsApp Message**
> **“सो गए क्या?”**
रोहन की सांस जैसे अचानक रुक गई।
यह एक बहुत साधारण-सा मैसेज था। लेकिन उसके लिए ये शब्द साधारण नहीं थे।
अनन्या हर रात ठीक इसी समय यही मैसेज भेजा करती थी।
**“सो गए क्या?”**
रोहन कभी जवाब देता—
> “तुम्हारे बिना नींद आती है क्या?”
और अनन्या लिखती—
> “झूठे कहीं के… दो मिनट में सो जाओगे।”
लेकिन अब यह सब केवल यादें थीं।
क्योंकि अनन्या की **छह महीने पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी।**
रोहन कांपते हाथों से मोबाइल की स्क्रीन देखता रहा।
मैसेज उसी नंबर से आया था।
वही नंबर, जिसे उसने आज तक अपने फोन से मिटाया नहीं था।
उसने WhatsApp प्रोफाइल खोली।
वही तस्वीर थी—पीली ड्रेस में मुस्कुराती हुई अनन्या। उसके बाल हवा में उड़ रहे थे और आंखों में वही चमक थी, जिसे देखकर रोहन अपनी सारी परेशानियां भूल जाता था।
रोहन ने डरते हुए टाइप किया—
> **“तुम कौन हो?”**
सिर्फ़ पांच सेकंड बाद जवाब आया—
> **“मैं वही हूं, जिससे तुमने हमेशा साथ रहने का वादा किया था।”**
रोहन के हाथ से मोबाइल लगभग गिर गया।
उसने तुरंत उस नंबर पर कॉल किया।
एक बार घंटी गई।
दूसरी बार घंटी गई।
तीसरी घंटी के बाद कॉल उठ गया।
लेकिन दूसरी तरफ कोई आवाज़ नहीं थी।
सिर्फ़ हल्की-सी सांसों की आवाज़ आ रही थी।
फिर बहुत धीमी आवाज़ सुनाई दी—
> **“रोहन…”**
रोहन का चेहरा सफेद पड़ गया।
वह आवाज़ अनन्या की थी।
बिल्कुल वैसी ही, जैसी वह उसे याद थी।
“अनन्या?”
दूसरी तरफ कुछ पल खामोशी रही।
फिर कॉल कट गया।
—
## **पहली मुलाकात**
तीन साल पहले रोहन और अनन्या की मुलाकात एक छोटी-सी किताबों की दुकान में हुई थी।
रोहन को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। अनन्या वहां अक्सर रोमांटिक उपन्यास खरीदने आती थी।
एक दिन दोनों ने एक ही किताब उठाने के लिए हाथ बढ़ाया।
दोनों के हाथ आपस में टकरा गए।
अनन्या ने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया।
“आप ले लीजिए,” उसने कहा।
रोहन मुस्कुराया।
“नहीं, आप ले लीजिए। वैसे भी मुझे लगता है कि इस किताब को मुझसे ज्यादा आपकी जरूरत है।”
अनन्या ने भौंहें चढ़ाईं।
“ऐसा क्यों?”
“क्योंकि किताब का नाम है—‘प्यार को समझना’। और आप थोड़ी गुस्से वाली लगती हैं।”
अनन्या कुछ सेकंड उसे घूरती रही, फिर हंस पड़ी।
वही हंसी रोहन के दिल में उतर गई।
उस दिन किताब अनन्या ले गई, लेकिन रोहन अपना दिल वहीं छोड़ आया।
कुछ दिनों बाद वे फिर मिले।
फिर मुलाकातें बढ़ने लगीं।
कभी चाय की दुकान पर, कभी कॉलेज के बाहर, कभी उसी किताबों की दुकान में।
अनन्या बहुत हंसमुख थी, लेकिन उसकी आंखों में हमेशा एक अनकहा डर छिपा रहता था।
रोहन कई बार पूछता—
“तुम कभी-कभी अचानक चुप क्यों हो जाती हो?”
अनन्या मुस्कुराकर बात टाल देती।
“क्योंकि कुछ बातें शब्दों से नहीं कही जातीं।”
“तो कैसे कही जाती हैं?”
“सिर्फ़ महसूस की जाती हैं।”
धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।
लेकिन उनका प्यार आसान नहीं था।
अनन्या एक अमीर परिवार से थी। उसके पिता राजीव मल्होत्रा शहर के जाने-माने उद्योगपति थे।
रोहन एक साधारण परिवार से था। उसके पिता की एक छोटी-सी स्टेशनरी की दुकान थी।
जब अनन्या के पिता को उनके रिश्ते के बारे में पता चला, तो उन्होंने साफ कह दिया—
“यह रिश्ता कभी नहीं हो सकता।”
अनन्या ने पहली बार अपने पिता के सामने आवाज़ उठाई।
“मैं रोहन से प्यार करती हूं।”
उसके पिता ने गुस्से से कहा—
“प्यार से जिंदगी नहीं चलती।”
अनन्या ने शांत स्वर में जवाब दिया—
“लेकिन बिना प्यार के जिंदगी जी भी नहीं जाती।”
—
## **एक अधूरा वादा**
विरोध के बावजूद रोहन और अनन्या मिलते रहे।
उन्होंने तय किया था कि जैसे ही रोहन को अच्छी नौकरी मिलेगी, वे शादी कर लेंगे।
एक शाम दोनों नदी किनारे बैठे थे।
सूरज डूब रहा था।
अनन्या ने अपना सिर रोहन के कंधे पर रख दिया।
“अगर हम कभी अलग हो गए तो?”
रोहन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“हम अलग नहीं होंगे।”
“लेकिन अगर किस्मत ने हमें अलग कर दिया तो?”
रोहन हंस पड़ा।
“तुम बहुत फिल्मी बातें करती हो।”
अनन्या ने उसकी ओर देखा।
उसकी आंखों में आंसू थे।
“वादा करो, चाहे कुछ भी हो जाए, तुम मुझे कभी भूलोगे नहीं।”
रोहन ने उसका हाथ अपने दिल पर रख दिया।
“जब तक यह धड़कता रहेगा, तुम्हारा नाम इसमें रहेगा।”
अनन्या मुस्कुराई।
“और जब यह धड़कना बंद हो जाए?”
रोहन ने कहा—
“तब शायद मैं वहीं आ जाऊंगा, जहां तुम होगी।”
अनन्या ने उसके होंठों पर हाथ रख दिया।
“ऐसा कभी मत कहना।”
उस दिन जाते समय अनन्या ने पीछे मुड़कर रोहन को बहुत देर तक देखा था।
जैसे उसे डर हो कि यह उनकी आखिरी मुलाकात हो सकती है।
—
## **वह दुर्घटना**
दो दिन बाद अनन्या अपने पिता के साथ एक शादी समारोह में गई थी।
रात करीब ग्यारह बजे उनकी कार शहर से लौट रही थी।
तेज बारिश हो रही थी।
एक मोड़ पर सामने से आ रहे ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी।
अनन्या के पिता को मामूली चोटें आईं।
लेकिन अनन्या गंभीर रूप से घायल हो गई।
रोहन को दुर्घटना की खबर अगली सुबह मिली।
वह पागलों की तरह अस्पताल पहुंचा।
लेकिन राजीव मल्होत्रा ने उसे अनन्या से मिलने नहीं दिया।
“उसकी जिंदगी से दूर रहो,” उन्होंने कहा।
रोहन ने हाथ जोड़ दिए।
“बस एक बार उसे देख लेने दीजिए।”
“तुम्हारी वजह से वह हमसे लड़ती रही। अब बहुत हो गया।”
रोहन अस्पताल के बाहर पूरी रात बैठा रहा।
अगली सुबह खबर आई—
**अनन्या नहीं रही।**
रोहन के लिए पूरी दुनिया जैसे खत्म हो गई।
वह उसके अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका।
राजीव मल्होत्रा ने अंतिम संस्कार शहर से दूर अपने पैतृक गांव में करवाया था।
रोहन के पास अनन्या की कुछ तस्वीरें, पुराने मैसेज और उसकी आवाज़ की रिकॉर्डिंग्स बची थीं।
वह हर रात उसके मैसेज पढ़ता और रोता।
खासकर वह आखिरी मैसेज—
> **“अगर मैं कभी तुमसे बहुत दूर चली जाऊं, तो मुझे ढूंढ़ना मत। बस इतना समझ लेना कि मैं तुम्हारी खुशियों में कहीं न कहीं जीवित हूं।”**
छह महीने बीत गए।
लेकिन रोहन आगे नहीं बढ़ पाया।
और अब, उसी नंबर से फिर मैसेज आ रहे थे।
—
## **दूसरी रात**
अगली रात रोहन ने मोबाइल अपने सामने रख लिया।
उसे उम्मीद भी थी और डर भी।
ठीक 11 बजकर 11 मिनट पर स्क्रीन चमकी।
> **“आज भी सोए नहीं?”**
रोहन ने तुरंत जवाब दिया—
> **“तुम अनन्या हो?”**
जवाब आया—
> **“तुम्हें क्या लगता है?”**
> **“अनन्या मर चुकी है।”**
कुछ देर तक कोई मैसेज नहीं आया।
फिर स्क्रीन पर शब्द उभरे—
> **“क्या तुमने अपनी आंखों से मुझे मरते हुए देखा था?”**
रोहन के भीतर कुछ टूट गया।
सच तो यह था कि उसने अनन्या का चेहरा अंतिम बार अस्पताल में भी नहीं देखा था।
उसे केवल बताया गया था कि अनन्या मर चुकी है।
उसने लिखा—
> **“तुम कहां हो?”**
जवाब आया—
> **“वहीं, जहां तुमने मुझे छोड़ दिया था।”**
रोहन ने तुरंत कॉल किया।
इस बार कॉल नहीं उठा।
कुछ क्षण बाद मोबाइल पर एक तस्वीर आई।
वह तस्वीर उसी किताबों की दुकान की थी, जहां वे पहली बार मिले थे।
तस्वीर आज ही ली गई थी, क्योंकि दुकान के बाहर उस दिन की तारीख वाला पोस्टर लगा था।
रोहन बिना समय गंवाए घर से निकल पड़ा।
बारिश तेज थी।
जब वह दुकान के पास पहुंचा तो वहां अंधेरा था।
दुकान बंद थी।
लेकिन सामने फुटपाथ पर पीली ड्रेस पहने एक लड़की खड़ी थी।
रोहन का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
“अनन्या!”
लड़की धीरे-धीरे उसकी ओर मुड़ी।
वह अनन्या नहीं थी।
लगभग बीस साल की एक लड़की थी। उसके चेहरे पर डर और बेचैनी थी।
“आप रोहन हैं?” उसने पूछा।
रोहन ने सिर हिलाया।
“तुम कौन हो?”
लड़की ने एक लिफाफा उसकी तरफ बढ़ाया।
“मेरा नाम सिया है। अनन्या दीदी ने यह आपके लिए दिया था।”
रोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“तुम अनन्या को कैसे जानती हो?”
सिया की आंखों में आंसू आ गए।
“क्योंकि उन्होंने मेरी जान बचाई थी।”
—
## **मौत का अधूरा सच**
सिया रोहन को पास के एक कैफे में ले गई।
उसने बताया कि दुर्घटना वाली रात वह भी उसी कार में थी।
वह अनन्या के पिता के एक कर्मचारी की बेटी थी। अनन्या उसे शादी समारोह से घर छोड़ने जा रही थी।
दुर्घटना में सिया गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
अनन्या भी घायल थी, लेकिन होश में थी।
“दीदी मुझे अस्पताल ले जाने की जिद कर रही थीं,” सिया ने कहा। “वह बार-बार कह रही थीं कि पहले मुझे बचाया जाए।”
सिया के अनुसार अनन्या को सिर पर गंभीर चोट लगी थी। डॉक्टरों ने कहा था कि उसके बचने की उम्मीद बहुत कम है।
लेकिन अनन्या तुरंत नहीं मरी थी।
वह अस्पताल में तीन दिन तक जीवित रही।
रोहन की आंखों से आंसू बहने लगे।
“मुझे बताया गया था कि वह अगली सुबह ही…”
सिया ने उसकी बात पूरी की—
“आपसे झूठ कहा गया था।”
अनन्या के पिता नहीं चाहते थे कि रोहन उससे मिले।
उन्होंने डॉक्टरों और स्टाफ को सख्त निर्देश दिए थे।
लेकिन मौत से एक दिन पहले अनन्या ने सिया को बुलाया।
उसने उसे अपना मोबाइल दिया और कहा—
> “अगर मैं रोहन तक नहीं पहुंच सकी, तो छह महीने बाद इस नंबर से उसे मैसेज करना।”
रोहन हैरान था।
“छह महीने बाद ही क्यों?”
सिया ने कहा—
“दीदी ने कहा था कि छह महीने तक आप शायद बहुत टूटे रहेंगे। वह नहीं चाहती थीं कि आप खुद को नुकसान पहुंचाएं। वह चाहती थीं कि जब आप थोड़ा संभल जाएं, तब आपको सच पता चले।”
रोहन ने कांपती आवाज़ में पूछा—
“कौन-सा सच?”
सिया ने लिफाफे की ओर इशारा किया।
“इसमें सब लिखा है।”
—
## **अनन्या का आखिरी खत**
रोहन ने लिफाफा खोला।
अंदर कई पन्नों का एक खत था।
कागज पर कुछ जगह खून के हल्के निशान थे और लिखावट कांपती हुई थी।
> **मेरे रोहन,**
>
> जब तुम यह खत पढ़ोगे, तब शायद मैं तुम्हारे पास नहीं रहूंगी।
>
> मुझे माफ करना कि मैं तुमसे आखिरी बार मिल भी नहीं सकी। पापा ने तुम्हें मुझसे दूर रखा, लेकिन शायद वह भी डर गए थे। उन्हें लगता था कि तुम्हारे आने से मैं जीने की उम्मीद पकड़ लूंगी, जबकि डॉक्टर कह चुके थे कि मेरे पास बहुत कम समय है।
>
> मैं तुमसे एक बात छिपाती रही।
>
> दुर्घटना से पहले भी मुझे पता था कि मेरे दिल की बीमारी गंभीर है। डॉक्टर ने कहा था कि बिना ऑपरेशन के मैं ज्यादा समय तक नहीं जी सकूंगी।
>
> मैंने तुम्हें इसलिए नहीं बताया, क्योंकि मैं तुम्हारी आंखों में दया नहीं देखना चाहती थी। मैं चाहती थी कि तुम मुझसे वैसे ही प्यार करो जैसे हमेशा करते थे—बिना डर के, बिना दुख के।
>
> दुर्घटना ने बस समय को थोड़ा पहले रोक दिया।
>
> तुमने मुझसे वादा किया था कि मुझे कभी नहीं भूलोगे। लेकिन मैं तुम्हें उस वादे से मुक्त करती हूं।
>
> मुझे भूलना मत, लेकिन मेरी याद में अपनी जिंदगी मत रोक देना।
>
> किसी दिन तुम्हें कोई ऐसी लड़की मिलेगी, जो तुम्हें मुझसे भी ज्यादा प्यार करेगी। उसका हाथ पकड़ने से मत डरना। यह मत सोचना कि तुम मुझे धोखा दे रहे हो।
>
> प्यार का अर्थ किसी को अपने दुख में कैद करना नहीं होता।
>
> मैं चाहती हूं कि तुम जियो।
>
> खूब हंसो।
>
> सफल बनो।
>
> अपने माता-पिता का ध्यान रखो।
>
> और किसी दिन जब तुम्हारी बेटी हो, तो उसका नाम मेरे नाम पर मत रखना। उसे अपनी अलग पहचान देना, क्योंकि मैं नहीं चाहती कि वह भी मेरी अधूरी कहानी का बोझ उठाए।
>
> बस एक बात याद रखना—
>
> हर रात 11 बजकर 11 मिनट पर जब तुम आसमान देखोगे, तो सबसे चमकता तारा मैं होऊंगी।
>
> तुम्हें परेशान करने के लिए नहीं…
>
> बस यह देखने के लिए कि तुम मुस्कुरा रहे हो या नहीं।
>
> **तुम्हारी,
> अनन्या**
रोहन खत को सीने से लगाकर रोने लगा।
सिया चुपचाप सामने बैठी रही।
कुछ देर बाद उसने कहा—
“दीदी ने एक और चीज़ दी थी।”
उसने अपना फोन निकाला और एक ऑडियो रिकॉर्डिंग चला दी।
अनन्या की कमजोर आवाज़ सुनाई दी—
> “रोहन… जब तुम यह आवाज़ सुनोगे, तब मैं शायद बहुत दूर जा चुकी होऊंगी। तुम मुझसे नाराज़ हो सकते हो। लेकिन प्लीज अपनी जिंदगी मत रोकना। हमारा प्यार अधूरा नहीं है। कुछ प्रेम कहानियां शादी पर खत्म नहीं होतीं। वे इंसान के भीतर हमेशा जीवित रहती हैं।”
रिकॉर्डिंग में कुछ सेकंड खामोशी थी।
फिर अनन्या ने बहुत धीमे कहा—
> “और हां… रात को समय पर सो जाया करो। हर बार मुझे ही मैसेज करना पड़ता है—‘सो गए क्या?’”
रिकॉर्डिंग समाप्त हो गई।
रोहन रोते-रोते मुस्कुरा दिया।
छह महीने में यह पहली बार था जब उसके चेहरे पर सच्ची मुस्कान आई थी।
—
## **एक और रहस्य**
रोहन ने सिया से पूछा—
“लेकिन पिछले दो दिनों से कॉल पर जो आवाज़ सुनाई दी, वह किसकी थी?”
सिया चौंक गई।
“मैंने आपको सिर्फ मैसेज किए थे। मैंने कोई कॉल नहीं उठाया।”
रोहन ने फोन खोला।
कॉल हिस्ट्री में दोनों कॉल मौजूद थीं।
वह नंबर अनन्या का ही था।
सिया ने कहा—
“यह संभव नहीं है। सिम मेरे फोन में था, लेकिन कल रात मेरे फोन पर कोई कॉल नहीं आया।”
दोनों कुछ क्षण चुप रहे।
रोहन ने इसे भ्रम समझकर बात टाल दी।
उस रात वह घर लौटा।
उसने अनन्या का खत अपने कमरे की मेज पर रखा।
ठीक 11 बजकर 11 मिनट पर उसका मोबाइल फिर चमका।
उसे लगा सिया ने मैसेज किया होगा।
लेकिन स्क्रीन पर लिखा था—
> **“अब तो मुस्कुरा दो…”**
रोहन ने तुरंत सिया को फोन किया।
“क्या तुमने अभी मैसेज किया?”
सिया ने कहा—
“नहीं। मैंने तो सिम निकालकर आपके दिए लिफाफे के साथ बैग में रख दिया था।”
रोहन के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
उसने कांपते हाथों से जवाब लिखा—
> **“अनन्या?”**
इस बार कोई उत्तर नहीं आया।
लेकिन उसकी खिड़की अचानक खुल गई।
ठंडी हवा कमरे में आई और मेज पर रखा अनन्या का खत हवा में उड़ने लगा।
एक पन्ना फर्श पर गिरा।
उस पन्ने के पीछे कुछ लिखा था, जिसे रोहन ने पहले नहीं देखा था।
> **“अगर मेरे जाने के बाद भी तुम्हें मेरा कोई मैसेज मिले, तो डरना मत। प्यार कभी-कभी वहां से भी लौट आता है, जहां से इंसान नहीं लौटते।”**
रोहन ने खिड़की से बाहर देखा।
आसमान साफ हो चुका था।
बादलों के बीच एक तारा बहुत तेज चमक रहा था।
रोहन की आंखों में आंसू थे।
लेकिन इस बार उसके चेहरे पर मुस्कान भी थी।
उसने धीरे से कहा—
“मैं ठीक हूं, अनन्या।”
उसी पल मोबाइल की स्क्रीन पर अंतिम मैसेज आया—
> **“अब मैं जा सकती हूं…”**
इसके बाद वह नंबर हमेशा के लिए बंद हो गया।
—
## **दो साल बाद**
समय बीतता गया।
रोहन ने अपने दुख को कमजोरी नहीं बनने दिया।
उसने अनन्या की याद में एक छोटी-सी संस्था शुरू की, जो सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करती थी।
उस संस्था का नाम उसने रखा—
**“11:11 उम्मीद”**
संस्था के उद्घाटन के दिन सिया भी वहां मौजूद थी।
राजीव मल्होत्रा भी आए थे।
दो साल में वह बूढ़े और कमजोर दिखने लगे थे।
उन्होंने रोहन के सामने हाथ जोड़ दिए।
“मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हें अनन्या से दूर रखा। मुझे लगता था कि मैं उसकी रक्षा कर रहा हूं, लेकिन मैंने उसके आखिरी पल और भी कठिन बना दिए।”
रोहन ने उनकी ओर देखा।
उसके मन में कभी बहुत गुस्सा था।
लेकिन अब केवल शांति थी।
उसने कहा—
“अनन्या आपको कभी दुखी नहीं देखना चाहती थी। मैं भी नहीं चाहता।”
राजीव मल्होत्रा रो पड़े।
उन्होंने संस्था को बड़ी आर्थिक सहायता दी।
धीरे-धीरे “11:11 उम्मीद” ने सैकड़ों लोगों की जिंदगी बचाई।
रोहन ने शादी नहीं की थी।
लेकिन इसलिए नहीं कि वह अनन्या की याद में कैद था।
वह बस सही समय और सही इंसान का इंतजार कर रहा था।
एक दिन संस्था में नई डॉक्टर आई।
उसका नाम था—नैना।
नैना शांत स्वभाव की थी। वह मरीजों के लिए दिन-रात काम करती थी।
कुछ महीनों में रोहन और नैना अच्छे दोस्त बन गए।
नैना को अनन्या के बारे में सब पता था।
एक शाम उसने रोहन से पूछा—
“क्या तुम्हें कभी लगता है कि किसी और से प्यार करना अनन्या की याद के साथ गलत होगा?”
रोहन कुछ देर चुप रहा।
फिर उसने अनन्या का खत उसे दिया।
नैना ने खत पढ़ा।
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
उसने कहा—
“अनन्या बहुत अच्छी थी।”
रोहन आसमान की ओर देखते हुए बोला—
“है। कुछ लोग चले नहीं जाते, बस दिखाई देना बंद हो जाते हैं।”
नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
इस बार रोहन ने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा।
—
## **अंतिम संदेश**
कुछ महीनों बाद रोहन और नैना की शादी हो गई।
शादी बहुत साधारण थी।
मंडप में एक कुर्सी खाली रखी गई थी।
उस कुर्सी पर पीले फूल और अनन्या की मुस्कुराती हुई तस्वीर रखी थी।
शादी की रात रोहन ने आसमान की ओर देखा।
घड़ी में 11 बजकर 11 मिनट हुए थे।
वही तारा चमक रहा था।
रोहन के फोन की स्क्रीन अचानक जल उठी।
कोई मैसेज नहीं था।
सिर्फ़ उसकी वॉलपेपर तस्वीर बदल गई थी।
वॉलपेपर पर अनन्या की वही पुरानी तस्वीर थी और नीचे एक लाइन लिखी थी—
> **“सच्चा प्यार किसी की जिंदगी रोकता नहीं… उसे फिर से जीना सिखाता है।”**
रोहन मुस्कुराया।
उसने फोन सीने से लगाया और धीरे से कहा—
“अलविदा, अनन्या।”
हवा का हल्का झोंका आया।
पास रखे पीले फूलों की खुशबू पूरे कमरे में फैल गई।
और रोहन समझ गया—
कुछ प्रेम कहानियों का अंत बिछड़ना नहीं होता।
वे किसी की याद बनकर, किसी की हिम्मत बनकर और किसी नए जीवन की शुरुआत बनकर हमेशा जीवित रहती हैं।
## **कहानी का संदेश**
सच्चा प्रेम केवल किसी को पा लेने का नाम नहीं है। कभी-कभी सच्चा प्रेम अपने प्रिय व्यक्ति को आगे बढ़ने, फिर से मुस्कुराने और नई जिंदगी शुरू करने की अनुमति देना भी होता है।
कुछ लोग हमारे साथ जीवनभर नहीं रह पाते, लेकिन उनका प्रेम हमें जीवनभर सही राह दिखाता रहता है।
वो हर रात मुझे मैसेज करती थी… लेकिन छह महीने पहले उसकी मौत हो चुकी थी
અમારી દરેક પોસ્ટ સૌથી પહેલા વાંચવા નીચેની પ્રોસેસ ફક્ત એકજ વાર કરવાની રહેશે.
<
આ વેબસાઈટ પર આપેલી તમામ સમાચાર અને વાતો રિપોર્ટરે રિપોર્ટ કરેલા છે અથવા તો કોઈક સોર્સ ઉપરથી લેવામાં આવેલા છે કે જે દરેક લેખના અંતમાં આપેલો જ હોય છે. અમારો પ્રયત્ન રહીયો કે તમને શ્રેષ્ઠ માહિતી સતત પહોંચાડવાનો છે અને રહેશે. આ સમાચાર તથા અન્ય વાતોની જવાબદારી જે-તે લેખક (રિપોર્ટર) તથા સોર્સની રહેશે www.gujjuabc.com વેબસાઈટ કે પેજની રહેશે નહીં.
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ટીમ Gujjuabc


